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Saturday, November 14, 2015

POEMS ON VIDAAI

POEMS ON VIDAAI

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POEMS ON VIDAAI

कन्यादान हुआ जब पूरा,आया समय विदाई का ।।
हँसी ख़ुशी सब काम हुआ था,सारी रस्म अदाई का । 

बेटी के उस कातर स्वर ने,बाबुल को झकझोर दिया ।।
पूछ रही थी पापा तुमने,क्या सचमुच में छोड़ दिया ।।

अपने आँगन की फुलवारी,मुझको सदा कहा तुमने ।।
मेरे रोने को पल भर भी ,बिल्कुल नहीं सहा तुमने ।। 

क्या इस आँगन के कोने में, मेरा कुछ स्थान नहीं ।।
अब मेरे रोने का पापा,तुमको बिल्कुल ध्यान नहीं ।।

देखो अन्तिम बार देहरी,लोग मुझे पुजवाते हैं ।।
आकर के पापा क्यों इनको,आप नहीं धमकाते हैं।। 

नहीं रोकते चाचा ताऊ,भैया से भी आस नहीं।।
ऐसी भी क्या निष्ठुरता है,कोई आता पास नहीं।।

बेटी की बातों को सुन के ,पिता नहीं रह सका खड़ा।।
उमड़ पड़े आँखों से आँसू,बदहवास सा दौड़ पड़ा ।। 

कातर बछिया सी वह बेटी,लिपट पिता से रोती थी ।।
जैसे यादों के अक्षर वह,अश्रु बिंदु से धोती थी ।।

माँ को लगा गोद से कोई,मानो सब कुछ छीन चला।।
फूल सभी घर की फुलवारी से कोई ज्यों बीन चला।। 

छोटा भाई भी कोने में,बैठा बैठा सुबक रहा ।।
उसको कौन करेगा चुप अब,वह कोने में दुबक रहा।।

बेटी के जाने पर घर ने,जाने क्या क्या खोया है।।
कभी न रोने वाला बापू,फूट फूट कर रोया है I I

Sunday, April 26, 2015

KABIR POEMS

KABIR POEMS

"ARE YOU LOOKING FOR ME?"

Are you looking for me? I am in the next seat.
My shoulder is against yours.
You will not find me in the stupas, not in Indian shrine rooms,
Nor in synagogues, nor in cathedrals: Not in masses,
Nor kirtans, not in legs winding around your own neck,
Nor in eating nothing but vegetables.
When you really look for me, you will see me instantly.
You will find me in the tiniest house of time.
Kabir says: Student, tell me, what is God?
He is the breath inside the breath.

-- Kabir

Thursday, April 23, 2015

HINDI POEM

HINDI POEM

"जो भाग्य में है ,
          वह भाग कर आएगा,
जो नहीं है ,
          वह आकर भी भाग जाएगा...!"
यहाँ सब कुछ बिकता है ,
         दोस्तों रहना जरा संभाल के ,
बेचने वाले हवा भी बेच देते है ,
                    गुब्बारों में डाल के ,
सच बिकता है , झूट बिकता है,
                   बिकती है हर कहानी ,
तीनों लोक में फेला है , फिर भी
                  बिकता है बोतल में पानी ,
कभी फूलों की तरह मत जीना,
          जिस दिन खिलोगे ,
                  टूट कर बिखर जाओगे ,
जीना है तो पत्थर की तरह जियो;
          जिस दिन तराशे गए ,
                 "भगवान" बन जाओगे....!!

Saturday, April 18, 2015

HINDI POEM

HINDI POEM

अच्छा था वो वक़्त पैसे कम हुआ करते थे,
दोस्त कमीने थे साले गम भी कम हुआ करते थे.
पास फेल का मौसम तो दो दिन की कहानी थी,
बाकी सेमेस्टर तो बस जिंदाबाद जवानी थी.
एग्जाम से पहले दो घंटे जब हम सब सबकी लेते थे,
और कुछ ही घंटो बाद सब चादर तान के सोते थे.
किसी ने भूल से पूछ दिया कि पेपर कैसा गया,
तो माँ बहेन के नारों से उसका मन भर देते थे.
आधी रात में चाय की तलब स्टेशन तक ले जाती थी,
और चाय भी क्या चाय थी जो धुंए में घुल जाती थी.
बर्थडे वाली शाम जो ढेरों खुशियाँ लाती थी,
जब मार मार के यार की तशरीफ सुजाई जाती थी.
बारिश की दो बूँदें भी एक ही संदेशा लाती थीं,
"भाई मौसम तो दारु वाला है" की धुन कानो में घुल जाती थी
दोस्ती का जज्बा जब दारू में घुल जाता था,
तो गली का साला कुत्ता भी उसका गवाह बन जाता था.
अब सब कुछ ज्यादा ज्यादा है तब कम भी अच्छा लगता था,
तुम कमीनो के साथ तो साला गम भी अच्छा लगता था...
HINDI POEM

HINDI POEM

एक बार एक कसाई गाय को
काट रहा था
और गाय हँस रही थी....
.
.
.
ये सब देख के कसाई बोला..
"मै तुम्हे मार रहा हू
और तुम मुझपर हँस क्यो रही हो...?"
.
.
.
.
.
गाय बोलीः जिन्दगी भर मैने घास के
सिवा कुछ नही खाया...
फिर भी मेरी मौत इतनी दर्दनाक है.
तो
हे इंसान जरा सोच
तु मुझे मार के खायेगा तो
तेरा अंत
कैसा होगा...?.
दूध पिला कर
मैंने तुमको बड़ा किया..
अपने बच्चे से भी छीना
पर मैंने तुमको दूध दिया..
रूखी सूखी खाती थी मैं,
कभी न किसी को सताती थी मैं..
कोने में पड़ जाती थी मैं,
दूध नहीं दे सकती मैं
अब तो गोबर से काम तो आती थी मैं,मेरे उपलों के आग
से तूने,
भोजन अपना पकाया था..
गोबर गैस से रोशन कर के,
तेरा घर उजलाया था..
क्यों मुझको बेच रहा रे,
उस कसाई के हाथों में...?
पड़ी रहूंगी इक कोने में,
मत कर लालच माँ हूँ मैं..
मैं हूँ तेरे कृष्ण की प्यारी,
वह कहता था जग से न्यारी..
उसकी बंसी की धुन पर मैं,
भूली थी यह दुनिया सारी..
मत कर बेटा तू यह पाप,
अपनी माँ को न बेच आप..
रूखी सूखी खा लूँगी मैं
किसी को नहीं सताऊँगी मैं
तेरे काम ही आई थी मै
तेरे काम ही आउंगी मैं..

अगर आप गौमाता से प्यार करते है
और आपने गौमाता का दूध पिया है
तो इस मेसेज को शेयर करके थोडा बहुत दूध का कर्ज
चुकता करे......!!!!
सर्व की एक पुकार...
गौ हत्या अब नहीं स्वीकार....!

गौमाता की यह पीड़ा जन जन तक
पहुँचाने के लिये केवल 2 मिनट का
समय निकाल कर दोस्तों को

शेयर जरुर करें....
HINDI POEM

HINDI POEM

देह मेरी ,
हल्दी तुम्हारे नाम की ।
हथेली मेरी ,
मेहंदी तुम्हारे नाम की ।
सिर मेरा ,
चुनरी तुम्हारे नाम की ।
मांग मेरी ,
सिन्दूर तुम्हारे नाम का ।
माथा मेरा ,
बिंदिया तुम्हारे नाम की ।
नाक मेरी ,
नथनी तुम्हारे नाम की ।
गला मेरा ,
मंगलसूत्र तुम्हारे नाम का ।
कलाई मेरी ,
चूड़ियाँ तुम्हारे नाम की ।
पाँव मेरे ,
महावर तुम्हारे नाम की ।
उंगलियाँ मेरी ,
बिछुए तुम्हारे नाम के ।
बड़ों की चरण-वंदना
मै करूँ ,
और 'सदा-सुहागन' का आशीष
तुम्हारे नाम का ।
और तो और -
करवाचौथ/बड़मावस के व्रत भी
तुम्हारे नाम के ।
यहाँ तक कि
कोख मेरी/ खून मेरा/ दूध मेरा,
और बच्चा ?
बच्चा तुम्हारे नाम का ।
घर के दरवाज़े पर लगी
'नेम-प्लेट' तुम्हारे नाम की ।
और तो और -
मेरे अपने नाम के सम्मुख
लिखा गोत्र भी मेरा नहीं,
तुम्हारे नाम का ।
सब कुछ तो
तुम्हारे नाम का...
नम्रता से पुछती हूँ..
आखिर तुम्हारे पास...
क्या है मेरे नाम का?
एक लड़की ससुराल चली गई।
कल की लड़की आज बहु बन गई.
कल तक मौज करती लड़की,
अब ससुराल की सेवा करना सीख गई.
कल तक तो टीशर्ट और जीन्स पहनती लड़की,
आज साड़ी पहनना सीख गई.
पिहर में जैसे बहती नदी,
आज ससुराल की नीर बन गई.
रोज मजे से पैसे खर्च करती लड़की,
आज साग-सब्जी का भाव करना सीख गई.
कल तक फुल स्पीड़ स्कुटी चलाती लड़की,
आज बाईक के पीछे बैठना सीख गई.
कल तक तो तीन वक्त पूरा खाना खाती लड़की,
आज ससुराल में तीन वक्त
का खाना बनाना सीख गई.
हमेशा जिद करती लड़की,
आज पति को पूछना सीख गई.
कल तक तो मम्मी से काम करवाती लड़की,
आज सासुमां के काम करना सीख गई.
कल तक भाई-बहन के साथ
झगड़ा करती लड़की,
आज ननद का मान करना सीख गई.
कल तक तो भाभी के साथ मजाक करती लड़की,
आज जेठानी का आदर करना सीख गई.
पिता की आँख का पानी,
ससुर के ग्लास का पानी बन गई.
फिर लोग कहते हैं कि बेटी ससुराल जाना सीख
गई.

शेयर टू एवरी वूमन..!!

HINDI POEM

HINDI POEM

कोई टोपी तो कोई अपनी पगड़ी बेच देता है..
मिले अगर भाव अच्छा, जज भी कुर्सी बेच देता है,


तवायफ फिर भी अच्छी, के वो सीमित है कोठे तक..
पुलिस वाला तो चौराहे पर वर्दी बेच देता है,


जला दी जाती है ससुराल में अक्सर वही बेटी..
के जिस बेटी की खातिर बाप किडनी बेच देता है,


कोई मासूम लड़की प्यार में कुर्बान है जिस पर..
बनाकर वीडियो उसका, वो प्रेमी बेच देता है,


ये कलयुग है, कोई भी चीज़ नामुमकिन नहीं इसमें..
कली, फल फूल, पेड़ पौधे सब माली बेच देता है,


किसी ने प्यार में दिल हारा तो क्यूँ हैरत है लोगों को..
युद्धिष्ठिर तो जुए में अपनी पत्नी बेच देता है...!!


धन से बेशक गरीब रहो,
पर दिल से रहना धनवान..!!


अक्सर झोपडी पे लिखा होता है "सुस्वागतम"..
और महल वाले लिखते है "कुत्ते से सावधान"..!!

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